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श्लोक 2.12.128  |
तबे स्वरूप गोसाञि तार घाड़े हात दिया ।
ढेका मारि’ पुरीर बाहिर राखिलेन लञा ॥128॥ |
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| अनुवाद |
| इस समय स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने गौड़ीय वैष्णव की गर्दन पकड़ ली और उन्हें हल्का सा धक्का देकर गुंडिका पुरी मंदिर से बाहर निकाल दिया और उन्हें बाहर ही रहने दिया। |
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| Then Swarup Damodara Goswami caught hold of the Gaudiya Vaishnava by the neck and pushed him out of the Gundicha Puri temple and left him outside. |
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