श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.12.106 
निर्मल, शीतल, स्निग्ध करिल मन्दिरे ।
आपन - हृदय येन धरिल बाहिरे ॥106॥
 
 
अनुवाद
जब मंदिर को साफ किया गया, तो वह पवित्र, शीतल और मनभावन हो गया, मानो भगवान का अपना शुद्ध मन प्रकट हो गया हो।
 
After being cleaned, the temple became pure, cool and pleasant, as if the pure mind of Mahaprabhu himself had appeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)