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श्लोक 2.12.101  |
केह जल आनि’ देय महाप्रभुर करे।
केह जल देय ताँर चरण - उपरे ॥101॥ |
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| अनुवाद |
| कोई श्री चैतन्य महाप्रभु के हाथों में जल डालने के लिए लाया, तो कोई उनके चरणकमलों पर जल उंडेलने लगा। |
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| Some of them would bring water in the hands of Mahaprabhu and some would pour water on his lotus feet. |
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