श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.11.88 
गोविन्द, माधव घोष, एइ वासु - घोष ।
तिन भाइर कीर्तने प्रभु पायेन सन्तोष ॥88॥
 
 
अनुवाद
"यहाँ गोविंद घोष, माधव घोष और वासुदेव घोष भी हैं। ये तीन भाई हैं और इनका संकीर्तन, सामूहिक कीर्तन, भगवान को बहुत प्रसन्न करता है।"
 
"And these are Govind Ghosh, Madhav Ghosh, and Vasudeva Ghosh. These three are brothers, and their chanting is very pleasing to Mahaprabhu."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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