श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.11.84 
श्रीवास - पण्डित ईंह, पण्डित - वक्रेश्वर ।
विद्यानिधि - आचार्य, इँह पण्डित - गदाधर ॥84॥
 
 
अनुवाद
“यहां श्रीवास पंडित, वक्रेश्वर पंडित, विद्यानिधि आचार्य और गदाधर पंडित हैं।
 
“These are Shrivas Pandit, Vakreshwar Pandit, Vidyanidhi Acharya and Gadadhar Pandit.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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