श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.11.6 
कर्णे हस्त दिया प्रभु स्मरे ‘नाराय ण’ ।
सार्वभौम, कह केन अयोग्य वचन ॥6॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही श्री चैतन्य महाप्रभु ने यह प्रस्ताव सुना, उन्होंने तुरन्त अपने कानों को अपने हाथों से ढक लिया और कहा, "हे मेरे प्रिय सार्वभौम, तुम मुझसे ऐसी अवांछनीय बात क्यों मांग रहे हो?
 
On hearing this proposal, Sri Chaitanya Mahaprabhu closed his ears with his hands and said, “Oh Sovereign, why are you requesting me for such an inappropriate thing?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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