श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.11.46 
प्रतापरुद्र छा ड़ि’ करिबे जगलिस्तार ।
एइ प्रतिज्ञा क रि’ करियाछेन अवतार ? ॥46॥
 
 
अनुवाद
“हाय! क्या श्री चैतन्य महाप्रभु ने महाराज प्रतापरुद्र नामक राजा को छोड़कर सभी प्रकार के पापियों का उद्धार करने के लिए अवतार लिया है?
 
“Alas, has Sri Chaitanya Mahaprabhu Maharaja incarnated only for the salvation of all sinners except the king named Prataparudra?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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