श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.11.3 
आर दिन सार्वभौम कहे प्रभु - स्थाने ।
अभय - दान दे ह’ यदि, करि निवेदने ॥3॥
 
 
अनुवाद
अगले दिन सार्वभौम भट्टाचार्य ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु से निवेदन किया कि वे उन्हें बिना किसी भय के वक्तव्य प्रस्तुत करने की अनुमति दें।
 
The next day Sarvabhauma Bhattacharya requested Chaitanya Mahaprabhu to give him permission so that he could speak his mind without any fear.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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