श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.11.225 
चारि - दिके चारि सम्प्रदाय उच्चैःस्वरे गाय ।
मध्ये ताण्डव - नृत्य करे गौरराय ॥225॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर चार संकीर्तन समूह बहुत जोर से कीर्तन कर रहे थे, और बीच में श्री चैतन्य महाप्रभु ऊंची छलांग लगाते हुए नृत्य कर रहे थे।
 
The four Sankirtan groups in all four directions were singing loudly and Sri Chaitanya Mahaprabhu was dancing in the middle, jumping up and down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)