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श्लोक 223
श्लोक
2.11.223
पिच्कारि - धारा जि नि’ अश्रु नयने ।
चारि - दिकेर लोक सब करये सिनाने ॥223॥
अनुवाद
प्रभु की आँखों से आँसू ज़ोर से बह रहे थे, मानो किसी सिरिंज से पानी बह रहा हो। सचमुच, उनके आस-पास मौजूद सभी लोग उनके आँसुओं से भीग गए।
A stream of tears flowed from Mahaprabhu's eyes, as if from a squirt gun. Those standing around him were drenched by his tears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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