श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.11.216 
अष्ट मृदङ्ग बाजे, बत्रिश करताल ।
हरि - ध्वनि करे सबे, बले - भाल, भाल ॥216॥
 
 
अनुवाद
चारों समूहों में आठ मृदंग और बत्तीस झाँझें थीं। सब मिलकर दिव्य ध्वनि उत्पन्न करने लगे और सबने कहा, "बहुत अच्छा! बहुत अच्छा!"
 
All four groups had eight mridangas and thirty-two cymbals. They all began to make divine sounds together, and everyone exclaimed, “Very good! Very good!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)