श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  2.11.212 
हेन - काले रामानन्द आइला प्रभु - स्थाने ।
प्रभु मिलाइल ताँरे सब वैष्णव - गणे ॥212॥
 
 
अनुवाद
इस समय रामानन्द राय भी श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने आये और भगवान ने इस अवसर का लाभ उठाकर उन्हें सभी वैष्णवों से परिचित कराया।
 
At the same time Ramanand Rai also came to meet Sri Chaitanya Mahaprabhu and Mahaprabhu took advantage of this opportunity to introduce him to all the Vaishnavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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