श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  2.11.202 
स्वरूप - गोसाञि प्रभुके कैल निवेदन ।
तुमि ना वसिले केह ना करे भोजन ॥202॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने तब श्री चैतन्य महाप्रभु को बताया, "जब तक आप बैठकर प्रसाद ग्रहण नहीं करेंगे, कोई भी इसे स्वीकार नहीं करेगा।
 
Then Svarupa Damodara Goswami informed Sri Chaitanya Mahaprabhu, “No one will eat until you sit down and take prasad.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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