श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.11.111 
राजा कहे , - उपवास, क्षौर - तीर्थेर विधान ।
ताहा ना करिया केने खाइब अन्न - पान ॥111॥
 
 
अनुवाद
राजा ने तब भट्टाचार्य से पूछा, "भक्तों ने तीर्थस्थान पर जाने के नियमों, जैसे उपवास, मुंडन आदि का पालन क्यों नहीं किया? उन्होंने पहले प्रसाद क्यों खाया?"
 
Then the king asked Bhattacharya, "Why did those devotees not follow the rules of visiting the pilgrimage site – such as fasting, getting their hair cut, etc.? Why did they take the prasad first?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd