श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.11.1 
अत्युद्दण्डं ताण्डवं गौरचन्द्रः कुर्वन्भक्तैः श्री - जगन्नाथ - गेहे ।
नाना - भावालङ्कताङ्गः स्व - धाम्ना चक्रे विश्वं प्रेम - वन्या - निमग्नम् ॥1॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने जगन्नाथ मंदिर में अपने सुंदर नृत्यों द्वारा समस्त विश्व को आनंद-सागर में लीन कर दिया। उन्होंने अत्यंत सुंदर नृत्य किया और ऊँची छलांग लगाई।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu immersed the entire world in an ocean of love with his beautiful dance inside the Jagannath Temple. He danced with great skill, leaping high.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)