श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.10.4 
वसिते आसन दिल क रि’ नमस्कारे ।
महाप्रभुर वार्ता तबे पुछिल ताँहारे ॥4॥
 
 
अनुवाद
जब सार्वभौम भट्टाचार्य राजा से मिले, तो राजा ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ बैठने को कहा और श्री चैतन्य महाप्रभु के बारे में पूछा।
 
When Sarvabhauma Bhattacharya met the king, the king respectfully offered him a seat and asked about Sri Chaitanya Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)