vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना
»
श्लोक 118
श्लोक
2.10.118
सेइ दामोदर आ सि’ दण्डवत् हैला ।
चरणे पड़िया श्लोक पड़िते लागिला ॥118॥
अनुवाद
जब स्वरूप दामोदर जगन्नाथ पुरी आये, तो वे श्री चैतन्य महाप्रभु के चरण कमलों में गिर पड़े, उन्हें प्रणाम किया और एक श्लोक का पाठ किया।
The same form of Damodar came to Jagannath Puri and fell at the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu and after paying obeisance, he recited a verse.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×