श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.1.97 
क्षीर - चुरि - कथा, साक्षि - गोपाल - विवरण ।
नित्यानन्द कैल प्रभुर दण्ड - भञ्जन ॥97॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु से भगवान चैतन्य महाप्रभु ने क्षीर-कुरि गोपीनाथ और साक्षी गोपाल की कथा सुनी। तब नित्यानंद प्रभु ने भगवान चैतन्य महाप्रभु की संन्यास-दंड को तोड़ दिया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu heard the stories of Ksheer-Churi Gopinath and Sakshigopal from Nityananda Prabhu. After this, Nityananda Prabhu broke the sannyasa punishment of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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