श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.1.93 
नित्यानन्द प्रभु महाप्रभु भुलाइया ।
गङ्गा - तीरे लञा आइला ‘यमुना’ बलिया ॥93॥
 
 
अनुवाद
सर्वप्रथम भगवान नित्यानन्द ने श्री चैतन्य महाप्रभु को गंगा के तट पर लाकर यह कहकर भ्रमित कर दिया कि यह यमुना नदी है।
 
First of all, while taking Sri Chaitanya Mahaprabhu along the banks of the Ganga, Nityananda Prabhu confused him by saying that it was the Yamuna River.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)