श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.1.54 
रथ - यात्राय आगे यबे करेन नर्तन ।
ताहाँ एइ पद मात्र करये गायन ॥54॥
 
 
अनुवाद
जब चैतन्य महाप्रभु उत्सव के दौरान रथ के आगे नृत्य करते थे, तो वे हमेशा निम्नलिखित दो पंक्तियाँ गाते थे।
 
During the Rath Yatra, when Chaitanya Mahaprabhu danced in front of the chariot, he always sang the following two lines.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)