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श्लोक 2.1.44  |
गोपाल - चम्पू - नामे ग्रन्थ - महाशूर ।
नित्य - लीला स्थापन याहे व्रज - रस - पूर ॥44॥ |
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| अनुवाद |
| गोपाल-कम्पू नामक ग्रन्थ सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं महान दिव्य साहित्य है। इस ग्रन्थ में भगवान की शाश्वत लीलाओं का वर्णन है तथा वृन्दावन में भोगी गई दिव्य लीलाओं का पूर्ण वर्णन है। |
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| Gopal Champu is the most famous and influential divine text. It establishes the eternal pastimes of the Lord and describes in detail the divine pleasures enjoyed in Vrindavan. |
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