| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ » श्लोक 39-40 |
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| | | | श्लोक 2.1.39-40  | दान - केलि - कौमुदी, आर बहु स्तवावली ।
अष्टादश लीला - च्छन्द, आर पद्यावली ॥39॥
गोविन्द - विरुदावली, ताहार लक्षण ।
मथुरा - माहात्म्य, आर नाटक - वर्णन ॥40॥ | | | | | | | अनुवाद | | श्रील रूप गोस्वामी ने दाना-केलि-कौमुदी, स्तवलि, लीला-चंड, पद्यावली, गोविंद-विरुदावली, मथुरा-माहात्म्य और नाटक-वर्णन का भी संकलन किया। | | | | Srila Rupa Goswami also composed the books Dana-Kamudi, Stavavali, Lila-Chanda, Padyavali, Govind Virudavali, Mathura-Mahatmya and Nataka-Varana. | | ✨ ai-generated | | |
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