श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.1.38 
रसामृत - सिन्धु, आर विदग्ध - माधव ।
उज्ज्वल - नीलमणि, आर ललित - माधव ॥38॥
 
 
अनुवाद
श्री रूप गोस्वामी द्वारा संकलित पुस्तकों में भक्ति-रसामृत-सिंधु, विदग्ध-माधव, उज्ज्वला-नीलमणि और ललिता-माधव शामिल हैं।
 
The texts composed by Sri Rupa Goswami include Bhaktirasamrita Sindhu, Vidagdha Madhava, Ujjwal-Nilmani and Lalit-Madhava.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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