श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.1.37 
प्रधान प्रधान किछु करिये गणन ।
लक्ष ग्रन्थे कैल व्रज - विलास वर्णन ॥37॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं श्रील रूप गोस्वामी द्वारा संकलित प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख करूँगा। उन्होंने वृन्दावन की लीलाओं का एक लाख श्लोकों में वर्णन किया है।
 
Therefore, I will list only the main texts written by Srila Rupa Goswami. He describes the pastimes of Vrindavan in one hundred thousand verses.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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