श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  2.1.280 
सूर्य यैछे उदय क रि’ चाहे लुकाइते ।
बुझिते ना पारि तैछे तोमार चरिते ॥280॥
 
 
अनुवाद
"ऐसा लगता है मानो सूर्य उदय होने के बाद छिप जाना चाहता हो। आपके व्यवहार में ऐसी विशेषताएँ हम समझ नहीं पाते।"
 
"It's like the sun trying to hide itself after it has risen. We can't understand such qualities of your character."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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