श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 279
 
 
श्लोक  2.1.279 
के शिखाल एइ लोके, कहे कोन्बात ।
इहा - सबार मुख ढाक दिया निज हात ॥279॥
 
 
अनुवाद
श्रीवास ठाकुर ने आगे कहा, "इन लोगों को किसने सिखाया है? ये क्या कह रहे हैं? अब आप अपने हाथ से इनके मुँह बंद कर सकते हैं।"
 
Srivasa Thakura continued, "Who taught these people? What are they saying? Now you can shut their mouths with your hands."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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