श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 254
 
 
श्लोक  2.1.254 
क्षेत्र - वासी रामानन्द राय प्रभृति ।
प्रभु - सङ्गे एइ सब कैल नित्य - स्थिति ॥254॥
 
 
अनुवाद
श्रील रामानन्द राय और जगन्नाथ पुरी के निवासी अन्य भक्त भी भगवान के साथ स्थायी रूप से रहने लगे।
 
Shri Ramanand Rai and other devotees living in Jagannath Puri also lived permanently with Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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