श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  2.1.241 
गङ्गा - तीर - पथे लञा प्रयागे आइला ।
श्री - रूप आ सि’ प्रभुके तथाइ मिलिला ॥241॥
 
 
अनुवाद
मथुरा से निकलकर भगवान गंगा तट के पथ पर चलते हुए अंततः प्रयाग (इलाहाबाद) नामक पवित्र स्थान पर पहुँचे। यहीं पर श्रील रूप गोस्वामी आए और भगवान से मिले।
 
After leaving Mathura, Mahaprabhu walked along the banks of the Ganges River and finally reached the sacred place of Prayag (Allahabad). It was here that Srila Rupa Goswami met Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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