दिन चार काशीते र हि’ गेला वृन्दावन ।
मथुरा देखियो देखे द्वादश कानन ॥239॥
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अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु बनारस में केवल चार दिन रुके और फिर वृंदावन चले गए। मथुरा नगरी देखने के बाद, उन्होंने बारह वनों का भ्रमण किया।
Sri Chaitanya Mahaprabhu stayed in Varanasi for only four days and then set off for Vrindavan. After visiting the city of Mathura, he visited twelve forests.
तात्पर्य
आज जो लोग वृंदावन आते हैं, वे अक्सर बारह स्थानों, जिन्हें बारह वन के नाम से जाना जाता है, पर भी जाते हैं। वे मथुरा से शुरुआत करते हैं जहाँ काम्यवन है। वहाँ से तलवन, तामलवन, मधुवन, कुसुमवन, भाँडीरवन, बिल्ववन, भद्रवन, खदिरवन, लोहवन, कुमुदवन और गोकुलमहावन जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥