श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  2.1.233 
शची - देवी आ नि’ ताँरे कैल नमस्कार ।
सात दिन ताँर ठाञि भिक्षा - व्यवहार ॥233॥
 
 
अनुवाद
इस अवसर का लाभ उठाकर श्री अद्वैत आचार्य प्रभु ने माता शचीदेवी को बुलाया और वे श्री चैतन्य महाप्रभु के लिए भोजन तैयार करने हेतु सात दिनों तक उनके घर पर रहीं।
 
Taking advantage of this opportunity, Sri Advaita Acharya Prabhu called Mata Shachidevi and she stayed in his house for seven days to prepare food for Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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