श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.1.216 
एत बलि दुँहार शिरे धरिल दुइ हाते ।
दुइ भाइ प्रभु - पद निल निज माथे ॥216॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने अपने दोनों हाथ उन दोनों के सिर पर रख दिए और बदले में उन्होंने तुरन्त भगवान के चरणकमल अपने सिर पर रख लिए।
 
Then Mahaprabhu placed both his hands on the heads of both of them and both of them immediately placed Mahaprabhu's lotus feet on their heads.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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