श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  2.1.213 
एइ मोर मनेर कथा केह नाहि जाने ।
सबे बले, केने आइला रामकेलि - ग्रामे ॥213॥
 
 
अनुवाद
"हर कोई पूछ रहा है कि मैं रामकेलि के इस गाँव में क्यों आया हूँ। कोई भी मेरे इरादों को नहीं जानता।
 
"Everyone is asking why I have come to this Ramkeli village. No one knows my purpose.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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