श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.1.207 
शुनि’ महाप्रभु कहे, - शुन, दबिर - खास ।
तुमि दुइ भाइ - मोर पुरातन दास ॥207॥
 
 
अनुवाद
दबिरा खास और शकरा मल्लिका की प्रार्थना सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मेरे प्रिय दबिरा खास, तुम दोनों भाई मेरे पुराने सेवक हो।
 
After listening to the prayers of Dabir Khas and Saker Mallik, Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “O Dabir Khas, you two brothers are my old servants.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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