श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.1.177 
तोमार मङ्गल वाञ्छे, कार्य - सिद्धि हय ।
इहार आशीर्वादे तोमार सर्वत्र - इ जय ॥177॥
 
 
अनुवाद
"ये पैगम्बर सदैव आपके मंगल की कामना करते हैं। उनकी कृपा से आपके सभी कार्य सफल होंगे। उनके आशीर्वाद से आपको सर्वत्र विजय प्राप्त होगी।"
 
"These messengers of God are always seeking your well-being. Their grace is the key to all your endeavors. Their blessings will bring you victory everywhere.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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