श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.1.170 
काजी, यवन इहार ना करिह हिंसन ।
आपन - इच्छाय बुलुन, याहाँ उँहार मन ॥170॥
 
 
अनुवाद
मुस्लिम राजा ने मजिस्ट्रेट को आदेश दिया, "ईर्ष्या के कारण इस हिंदू पैगम्बर को परेशान मत करो। उसे जहाँ चाहे अपनी इच्छा पूरी करने दो।"
 
The Muslim king ordered his Qazi (magistrate), "Don't harass this messenger of the Hindu God out of jealousy. Let him do whatever he wants, wherever he wants."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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