श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  2.1.162 
‘काना ञिर नाटशाला’ हैते आसिब फिरि ञा ।
जानिबे पश्चात्, कहिलु निश्चय करि ञा ॥162॥
 
 
अनुवाद
नृसिंहानन्द ब्रह्मचारी ने कहा, "भगवान कानई नाटशाला जाएँगे और फिर लौटेंगे। यह बात आप सभी को बाद में पता चलेगी, लेकिन मैं अभी यह बात पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ।"
 
Nrisimhananda Brahmachari said, "Mahaprabhu will go to Kanai Theatre and return. You will know this later, but I am saying this now with great confidence."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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