श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  2.1.157 
पथे दुइ दिके पुष्प - बकुलेर श्रेणी ।
मध्ये मध्ये दुइ - पाशे दिव्य पुष्करिणी ॥157॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने मन ही मन सड़क के दोनों किनारों को बकुला फूलों के पेड़ों से सजाया और दोनों तरफ अंतराल पर उन्होंने पारलौकिक प्रकृति की झीलें बनाईं।
 
He mentally decorated both sides of the road with Bakul flower trees and created divine lakes in between on both sides.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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