श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  2.1.153 
कुलिया - ग्रामे कैल देवानन्देरे प्रसाद ।
गोपाल - विप्रेरे क्षमाइल श्रीवासापराध ॥153॥
 
 
अनुवाद
इस समय श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा किये गये विशिष्ट कार्य थे, देवानंद पंडित पर कृपा करना तथा गोपाल चापाल नामक ब्राह्मण को श्रीवास ठाकुर के चरणकमलों पर किये गये अपराध से क्षमा प्रदान करना।
 
Among the special works done by Sri Chaitanya Mahaprabhu at this time, the main ones were showing mercy to Devananda Pandit and forgiving a Brahmin named Gopal Chapal, who had committed a crime against the lotus feet of Srivasa Thakur.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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