श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.1.148 
वृन्दावन याइते कैल गौड़ेरे गमन ।
प्रतापरुद्र कैल पथे विविध सेवन ॥148॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावन दर्शन हेतु भगवान गौड़देश [बंगाल] गए। रास्ते में राजा प्रतापरुद्र ने भगवान को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार की सेवाएँ कीं।
 
To go to Vrindavan, Mahaprabhu first went to Gauda Desh (Bengal). On the way, King Prataparudra performed various services to please Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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