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श्लोक 2.1.111  |
चातुर्मास्य - अन्ते पुनः दक्षिण गमन ।
परमानन्द - पुरी सह ताहाञि मिलन ॥111॥ |
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| अनुवाद |
| चातुर्मास के बाद, भगवान चैतन्य महाप्रभु दक्षिण भारत में भ्रमण करते रहे। उस समय उनकी भेंट परमानंद पुरी से हुई। |
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| After the Chaturmas was over, Sri Chaitanya Mahaprabhu traveled throughout South India. It was then that he met Paramananda Puri. |
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