श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.1.104 
गोदावरी - तीर - वने वृन्दावन - भ्रम ।
रामानन्द राय सह ताहाञि मिलन ॥104॥
 
 
अनुवाद
एक बार भगवान ने गोदावरी नदी के तट पर स्थित वन को वृन्दावन समझ लिया। वहाँ उनकी भेंट रामानन्द राय से हुई।
 
Once, Mahaprabhu mistook a forest on the banks of the Godavari River for Vrindavan. There, he met Ramanand Rai.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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