श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.1.100 
नित्यानन्द, जगदा नन्द, दामोदर, मुकुन्द ।
पाछे आ सि’ मिलि’ सबे पाइल आनन्द ॥100॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद का साथ छोड़कर अकेले ही जगन्नाथ मंदिर चले गए थे, लेकिन बाद में नित्यानंद, जगदानंद, दामोदर और मुकुंद उनसे मिलने आए और उन्हें देखकर वे बहुत प्रसन्न हुए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu left Nityananda and went alone to the Jagannath temple, but later Nityananda, Jagadananda, Damodara and Mukunda came to meet him and they were all very happy to see him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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