श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.1.10 
एबे कहि शेष - लीलार मुख्य सूत्र - गण ।
प्रभुर अशेष लीला ना याय वर्णन ॥10॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की अनंत लीलाओं का वर्णन करना संभव नहीं है, किन्तु अब मैं मुख्य घटनाओं का वर्णन करना चाहता हूँ तथा अंत में घटित होने वाली लीलाओं का सारांश देना चाहता हूँ।
 
It is not possible to describe the infinite pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu, but now I would like to narrate the main events and present the essence of the pastimes that took place at the end.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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