| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 9: भक्ति का कल्पवृक्ष » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 1.9.7  | प्रभु कहे, आमि ‘विश्वम्भर’ नाम धरि ।
नाम सार्थक हय, यदि प्रेमे विश्व भरि ॥7॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान चैतन्य ने सोचा, "मेरा नाम विश्वम्भर है, 'जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का पालन करता है।' इसका अर्थ तभी साकार होगा जब मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भगवद् प्रेम से भर सकूँ।" | | | | Chaitanya Mahaprabhu thought, "My name is Vishvambhar, meaning the one who sustains the entire universe. This name will be meaningful only if I fill the entire universe with love for God." | | ✨ ai-generated | | |
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