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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 9: भक्ति का कल्पवृक्ष  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.9.51 
एइ मालाकार खाय एइ प्रेम - फल ।
निरवधि मत्त रहे, विवश - विह्वल ॥51॥
 
 
अनुवाद
महान माली, भगवान चैतन्य, स्वयं इस फल को खाते हैं, और परिणामस्वरूप वे निरन्तर पागल बने रहते हैं, मानो असहाय और भ्रमित हों।
 
This great gardener, Sri Chaitanya Mahaprabhu, himself eats this fruit; as a result, he remains constantly in a frenzy, as if helpless and bewildered.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु का मिशन स्वयं कार्य करना और लोगों को शिक्षा देना है। वे कहते हैं, आपानि आचरि' भक्ति करिला प्रचार (चैतन्य चरितामृत आदि 4.41)। पहले व्यक्ति को स्वयं कार्य करना चाहिए और उसके बाद शिक्षा देनी चाहिए। यह एक वास्तविक शिक्षक का कार्य है। जब तक कोई व्यक्ति उस दर्शन को समझने में सक्षम नहीं होता है, जिसके बारे में वह बोलता है, तब तक यह प्रभावी नहीं होगा। इसलिए व्यक्ति को न केवल चैतन्य पंथ के दर्शन को समझना चाहिए, बल्कि उसे अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू भी करना चाहिए।

हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करते हुए, श्री चैतन्य महाप्रभु कभी-कभी बेहोश हो जाते थे और कई घंटों तक बेसुध रहते थे। वे अपने शिछाष्टक (7) में प्रार्थना करते हैं:

युगायितं निमेषेण चक्षुषा प्रावृषायितं

शून्ययितं जगत् सर्वं गोविंद-विरहेण मे

"हे गोविंद! आपके वियोग को महसूस करते हुए, मैं एक पल को बारह वर्ष या उससे अधिक मान रहा हूं। मेरी आंखों से बारिश की धारों की तरह आंसू बह रहे हैं, और आपकी अनुपस्थिति में मुझे दुनिया में सब कुछ खाली लग रहा है।" श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा दर्शाए गए हरे कृष्ण मंत्र के जाप और ईश्वर के प्रेम का फल प्राप्त करने का यह पूर्णता का चरण है। व्यक्ति को कृत्रिम रूप से इस अवस्था की नकल नहीं करनी चाहिए, लेकिन अगर कोई गंभीर है और ईमानदारी से नियमनकारी सिद्धांतों का पालन करता है और हरे कृष्ण मंत्र का जाप करता है, तो समय आएगा जब ये लक्षण दिखाई देंगे। उसकी आँखों में आँसू भर जाएँगे, वह महामंत्र का स्पष्ट रूप से उच्चारण नहीं कर पाएगा और हर्षोल्लास में उसका हृदय धड़केगा। श्री चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कि व्यक्ति को इसकी नकल नहीं करनी चाहिए, लेकिन एक भक्त को उस दिन के लिए तरसना चाहिए जब ऐसी समाधि के लक्षण स्वतः उसके शरीर में प्रकट हों।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)