श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 9: भक्ति का कल्पवृक्ष  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.9.39 
अतएव सब फल दे ह’ यारे तारे ।
खाइया हउक् लोक अजर अमरे ॥39॥
 
 
अनुवाद
"इस कृष्णभावनामृत आंदोलन को पूरे विश्व में फैलाओ। लोग इन फलों को खाएँ और अंततः बुढ़ापे और मृत्यु से मुक्त हो जाएँ।"
 
Spread this Krishna Consciousness movement throughout the world, so that all people can eat these fruits and ultimately become free from old age and death.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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