श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 9: भक्ति का कल्पवृक्ष  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.9.16 
मध्य - मूल परमानन्द पुरी महा - धीर ।
अष्ट दिके अष्ट मूल वृक्ष कैल स्थिर ॥16॥
 
 
अनुवाद
गंभीर एवं शान्त परमानंद पुरी को केन्द्रीय मूल तथा अन्य आठ जड़ों को आठ दिशाओं में स्थापित करके चैतन्य महाप्रभु का वृक्ष दृढ़तापूर्वक खड़ा था।
 
The calm and serious Paramananda Puri became the main (central) root and the tree in the form of Sri Chaitanya Mahaprabhu became stable with the other eight roots in all the eight directions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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