श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 9: भक्ति का कल्पवृक्ष  »  श्लोक 13-15
 
 
श्लोक  1.9.13-15 
परमानन्द पुरी, आर केशव भारती ।
ब्रह्मानन्द पुरी, आर ब्रह्मानन्द भारती ॥13॥
विष्णु - पुरी, केशव - पुरी, पुरी कृष्णानन्द ।
श्री - नृसिंहतीर्थ, आर पुरी सुखानन्द ॥14॥
एइ नव मूल निकसिल वृक्ष - मूले ।
एइ नव मूले वृक्ष करिल निश्चले ॥15॥
 
 
अनुवाद
परमानंद पुरी, केशव भारती, ब्रह्मानंद पुरी और ब्रह्मानंद भारती, श्री विष्णु पुरी, केशव पुरी, कृष्णानंद पुरी, श्री नृसिंह तीर्थ और सुखानंद पुरी - ये नौ संन्यासी जड़ें पेड़ के तने से निकलीं। इस प्रकार पेड़ इन नौ जड़ों के बल पर मजबूती से खड़ा रहा।
 
These nine sannyasis—Shri Paramananda Puri, Keshav Bharati, Brahmanand Puri, Brahmanand Bharati, Shri Vishnu Puri, Keshav Puri, Krishnanand Puri, Shri Nrisimha Tirtha, and Sukhananda Puri—are the roots that sprouted from the trunk of that tree. Thus, the tree stood firm on the strength of these nine roots.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd