कृष्ण नाहि माने, ताते दैत्य क रि’ मानि ।
चैतन्य ना मानिले तैछे दैत्य तारे जानि ॥9॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
जो व्यक्ति कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् के रूप में स्वीकार नहीं करता, वह निश्चय ही राक्षस है। इसी प्रकार, जो व्यक्ति श्री चैतन्य महाप्रभु को कृष्ण, अर्थात् उन्हीं परमेश्वर को, स्वीकार नहीं करता, उसे भी राक्षस ही माना जाना चाहिए।
Anyone who does not accept Krishna as the Supreme Personality of Godhead is certainly an Asura. Similarly, anyone who does not accept Sri Chaitanya Mahaprabhu as the Supreme Personality of Godhead, Krishna, should also be considered an Asura.
तात्पर्य
पहले जरासंध जैसे राजा थे जिन्होंने वैदिक अनुष्ठानों का सख्ती से पालन किया, वे दानी, सक्षम क्षत्रिय थे, सभी क्षत्रिय गुणों से संपन्न थे और ब्राह्मण संस्कृति के प्रति आज्ञाकारी भी थे लेकिन उन्होंने कृष्ण को भगवान के रूप में स्वीकार नहीं किया। जरासंध ने कई बार कृष्ण पर हमला किया था, और हर बार, वह हार जाता था। जरासंध की तरह, जो कोई भी वैदिक अनुष्ठान करता है लेकिन कृष्ण को भगवान के रूप में स्वीकार नहीं करता है, उसे आसुरी या दानव समझा जाना चाहिए। इसी प्रकार, जो श्री चैतन्य महाप्रभु को कृष्ण के रूप में स्वीकार नहीं करता है, वह भी एक राक्षस है। यह आधिकारिक ग्रंथों का निष्कर्ष है। इसलिए, कृष्ण की भक्ति सेवा के बिना गौरासुंदर की तथाकथित भक्ति और गौरासुंदर की भक्ति सेवा के बिना तथाकथित कृष्ण-भक्ति, दोनों ही अभक्तिपूर्ण क्रियाकलाप हैं। यदि कोई कृष्ण भावना के मार्ग पर सफल होना चाहता है, तो उसे गौरासुंदर के व्यक्तित्व और कृष्ण के व्यक्तित्व दोनों के प्रति पूरी तरह से जागरूक होना चाहिए। गौरासुंदर के व्यक्तित्व को जानने का अर्थ है श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु-नीत्यानंद श्री-अद्वैत गदाधर श्रीवासादि-गौरा भक्त-वृंद के व्यक्तित्व को जानना। श्री चैतन्य-चरितामृत के लेखक, अधिकारियों के अनुसार, कृष्ण चेतना में पूर्णता के लिए इस सिद्धांत पर जोर देते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥