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श्लोक 1.8.84  |
श्री - रूप - रघुनाथ - चरणेर एइ बल ।
याँर स्मृते सिद्ध हय वाञ्छित - सकल ॥84॥ |
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| अनुवाद |
| श्री रूप गोस्वामी और रघुनाथदास गोस्वामी के चरणकमल ही मेरी शक्ति के स्रोत हैं। उनके चरणकमलों का स्मरण करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। |
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| The lotus feet of Sri Rupa Goswami and Raghunathdas Goswami are the source of my strength. Remembering their feet can fulfill all a person's desires. |
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